इन व्क्यंशों में छुपा है डर से मुकाबला कर दो चार हाथ कर लेने की कुब्बत ,वह गुर्जरों में कूट कूट कर भरी है ,
गुर्जरों ने डरना तो सीखा ही नहीं ,चाहे वो अरब आक्रान्ता रहे हों या अंग्रेज सबसे खूब लोहा लिया ,हार नहीं मानी रार खूब ठानी ,डर का सामना होने पर जहां अच्छे अच्छे योद्धाओं की घिग्घी बंध जाती है वहां गुर्जर डंटे रहते है ,यह सब डर से मुकाबले की ट्रेनिंग हमारे वातावरण में मौजूदऔर अंदरूनी ताकत हमारे खून और जींस मैं मौजूद है
आइये हम जाने डर से मुकाबले के लिए क्या परिस्थितियां जरूरी हैं .,
डर हर व्यक्ति तो क्या हर जीव को सताता है ,हम डर से जीवन की समस्त जीवन पद्धति को सीखते हैं ,डर और इच्छा रहित कोई जीव या इंसान नहीं ,सिर्फ निर्जीव वस्तुएं ,डर और इच्छा रहित हो सकती हैं
,जब हमारे अन्दर जीवन जीने की इच्छा मौजूद रहती है तो हम डर से बचना सीखते हैं ,डर पर काबू पाना सीखते हैं
पेन्सिल्वेनिया यूनीवर्सिटी के वैज्ञानिक साईकोलोजिस्ट, मार्टिन सेल्डिगमेन, ने अपने शोध कार्यों में पाया कि डर पर काबू पाना सीखने के लिए हमारी जीवन जीने की आकांक्षा का होना बहुत जरुरी है ,हम जीवन जीने के लिए तभी तक संघर्ष करते हैं जब हमें जीवन जीने की आशा बची होती है
,यह साबित करने के लिए की हर इंसान पर डर से मुकाबला करने के लिए ट्रेनिंग का बिशेष महत्व होता है मार्टिन महोदय ने कुत्तों के ऊपर एक अद्भुत प्रयोग किया ,उसने कुत्तो के two A,B,समूह बनाए
समूह A के कुत्तों को एक पिंजरे में बंद कर पट्टे से बांध दिया गया ,फिर उन्हें नियंत्रित मात्र में कुछ सेकेंड्स के लिए पिंजरे के फर्श में बिछी रोड्स से विद्युत करंट लगाया गया ,मार्टिन महोदय ने देखा की कुत्तों को भागने या उछलने की कोई स्वतंत्रता नहीं थी अतः ग्रुप अ के कुत्तों ने भाग्य को ही अपनी नियति मान लिया और करंट लगाने को चुप चाप लेटकर सहन करते रहे ,
अब उन्होंने दूसरा ग्रुप B का परीक्षण करते समय कुत्तों को पिंजरे में फ्री छोड़ दिया ,और उतनी ही मात्र में पिंजरे के फर्श में बिछी रोड्स से विद्युत करंट लगाया गया ,अब मार्टिन ने देखा की यह कुत्ते करंट लगाने पर पहाडी बकरी की तरह करंट प्रवाह होने उछलने लगे और अपना बचाव सीख गए
,इस ट्रेनिंग के बाद जब मुख्य प्रयोग शुरू किया गया तो पाया गया ,की जिन कुत्तों को पट्टे से बाँध कर करंट प्रवाह से आदी बना दिया गया था ,पिजरे में बिना पट्टा बंधे खुला छोड़ने पर भी न तो करंट से बचने के लिए उछलने की प्रक्रिया दुहराई ना ही उस खिड़की से बच कर भागने की कोशिश की जो की उस दीवार में खुली छोड़ दी थी ,लेकिन ग्रुप बी के कुत्ते पहले तो जlन बचने के लिए उछले बाद में खुली खिड़की से कूद कर भाग गए ,
यहाँ मार्टिन महोदय ने निष्कर्ष निकाला जिन कुत्तों को डर के साथ कम्प्रोमाईज कर खुद को डर से साथ अडजस्ट करना सीख लिया था उन्होंने जीवन से मोह छोड़ कर भाग्य के भरोसे डिप्रेसन में जीना सीख लिया था,लेकिन दूसरे ग्रुप ने अपनी जान बचाने का हर संभव उपाय करना सीख लिया था
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